छत्तीसगढ़िया व्यंजन

[17/12 9:54 pm] गणेश शंकर गौर: छत्तीसगढ़ का खाना

मीठे व्यंजन नमकीन व्यंजन
तसमई
छत्तीसगढ़ी तसमई खीर जैसा व्यंजन है । दूध, चांवल का यह पकवान गर्मी-खुशी में विशेष तौर पर बनता है ।

खुरमी
गेहूं तथा चावल के आटे के मिश्रण से निर्मित मीठी प्रकृति का लोकप्रिय व्यंजन है । गुड़ चिरौंजी और नारियल इसका स्वाद बढ़ा देते हैं ।

पपची
गेहूं-चावल के आटे से बनी पपची बालूशाही को भी मात कर सकती है । मीठी पपची मंद आंच में सेके जाने से कुरमुरी और स्वादिष्ट बन जाती है ।

अइरसा
चावल आटा और गुड़ की चाशनी से बना छत्तीसगढ़ी पकवानों का स्वादिष्ट रुप है ।

देहरौरी
दरदरे चांवल और चाशनी में भींगी देहरौरी को रसगुल्ले का देसी रुप कह सकते हैं ।

ठेठरी
लम्बी या गोल आकृति वाला यह नमकीन व्यंजन बेसन से बनता है ।

करी
करी, बेसन का मोटा सेव है, इसे नमक डालकर नमकीन करी बनाते हैं तथा बिना नमक के करी से गुड़ वाला मीठा लड्डू बनता है । दुःख-सुख के अवसरों में करी का गुरहा लड्डू बनाया जाता है ।

सोहारी
शादि-ब्याह और भोज में पतली और बड़ी पूरी-सोहारी बनायी जाती है ।

बरा
उड़द दाल से बने इस व्यंजन का शादि-ब्याह तथा पितर में विशेष चलन है ।

चीला
चावल के आटे में नमक डालने से नुनहा चीला बनता है एवं घोल में गुड़ डाल देने से गुरहा चीला । इन दोनों चीले का स्वाद हरी मिर्च और पताल की चटनी से बढ़ जाता है ।

छत्तीसगढ़ी व्यंजन संतुलित, स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट होते हैं । साथ ही पारंपरिकता की सौंधी महक इनको बेजोड़ बनाती है । आधुनिकता के इस दौर में चूल्हा-चौके से निकले स्वाद के अपने और विनम्र संसार में उतरने का अवसर दे रहा है।


 फरा

फरा धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ प्रांत का चावल से बना एक और व्यंजन है। बनाने की विधि अत्यंत सरल है, केवल चावल के आटे को गूंथ कर हाथों से 3-3.5 इंच के छोटे-छोटे टुकड़े करने है, पहले गोल करें (लोई) फिर बीच से चपटा कर मछली सा आकार दे दें। अब बस भाप से पकाना है।
वैसे, इसे पकाने के दो तरीके हैं, यदि आप तीखा खाने के शौकिन हैं तो बनाई हुई लोई को पहले तेल में लाल मिर्च डालकर हल्के से सेंक ले फिर ऊपर से पानी डालकर भाप में पकने दें। या फिर बिना तले हुए प्रेशर कुकर या फिर इटली बनाने के बर्तन में भाप में पका लें। पकने के बाद इसे मिर्ची की चटनी से साथ परोसइए।
सावधानीः इस्तेमाल में चीले की तरह केवल नया चावल इस्तेमाल किया जाता है।प्रेषकः-आर्यन चिराम

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